अभि अभि मेरे दिल मे खयल आता है की लोग पड़ने वाले पडे हुए अनपड क्यो बनते जा रहे है सभी शहरिकरन की ओर ढलते जा रहे है!किसकी नजर लगी इस गाव को कि आधुनिकता कि साथ लोग पुरानी संक्रती को भि भुल गये!अधुनिक ता का एसा दोर चला की लोग अपनी
परंपरा को भुल गये!
बदल रहा है रणायरा बदल रहा है ranayarA
मेरा रणायरा अब बदल चला है
कुछ अजीब सा माहौल हो चला है,
मेरा गाॅव अब बदल चला है
. ढूंढता हूँ उन परिंदों को,
जो बैठते थे कभी घरों के छज्ज़ो पर
शोर शराबे से आशियाना अब उनका उजड़ चला है, मेरा ़रणायरा अब बदल चला है…..
होती थी सायकलों की सवारी मंज़िल तो वही है मुसाफिर अब बाइक्स व कारों में चढ़ चला है
मेरा रणायरा अब बदल चला है…
भुट्टे, कबीट, ककड़ी, इमली खाते थे
कभी हम स्कूल कॉलेजो के प्रांगण में,
अब तो बस बेक समोसा, पेस्ट्री और क्रीम रोल का दौर चला है
मेरा रणायरा अब बदल चला है….
गाॅव के मोहल्ले रुक कर बतियाते थ
दोस्त घंटों तक अब तो बस शादी, पार्टी या उठावने पर मिलने का ही दौर चला है
मेरा रणायरा अब बदल चला है
…. वो टेलीफोन का काला चोगा उठाकर खैर-ख़बर पूछते थे,
अब तो स्मार्टफोन से फेसबुक, व्हाटसऐप और ट्वीटर का रोग चला है
मेरा रणायरा अब बदल चला है…
.. अब तो सेन्डविच, बेक समोसा, पेस्ट्री और क्रीम रोल की ओर चला है
मेरा रणायरा अब बदल चला है….
वो साइकिल पर बैठकर, दूर की डबल सवारी, कभी होती उसकी, कभी हमारी बारी,
अब तो बस फर्राटेदार बाइक का फैशन चला है मेरा रणायरा अब बदल चला है…
. जाते थे कभी ट्यूशन पढ़ने माड़ साब के वहाँ,
बैठ जाते थे फटी दरी पर भी पाँव पसार कर ,
अब तो बस कोचिंग क्लासेस का धंधा चल पड़ा है,
मेरा रणायरा अब बदल चला है…..
खो-खो, सितोलिया, क्रिकेट, गुल्लिडंडा, डिब्बा-डाउन खेलते थे
गलियों और मोहल्लों में कभी, अब तो न वो गलियाँ रही, न मोहल्ले न वो खेल, सिर्फ और सिर्फ कम्प्यूटर गेम्स का दौर चला है,
मेरा रणायरा अब बदल चला हैं…..
रेडियो में अल-सुबह तक चलते क्लासिकल गाने-बजाने के सिलसिले अब तो एफएम और डीजे का वायरल चल पड़ा है,
मेरा रणायरा अब बदल चला है….
स्कुल काॅलेज की लड़कियों से बात करना तो दूर नज़रें मिलाना भी मुश्किल था
अब तो बेझिझक हाय ड्यूड, हाय बेब्स का रिवाज़ चल पड़ा है
मैरा रणायरा अब बदल चला है…. घर में तीन भाइयों में होती थी एकाध साइकिल पिताजी के पास स्कूटर,
अब तो हर घर में कारों और बाइक्स का काफ़िला चल पड़ा है
मेरा रणायरा अब बदल चला है….
खाते थे समोसे, कचोरी, जलेबी, गराडू, गरमा-गरम पोहे चौराहो पर,
अब वहाँ भी चाउमिन, नुडल्स, मन्चूरियन का स्वाद चला हैं
मेरा रणायरा बदल चला है….
कोई बात नहीं; सब बदले लेकिन मेरे शहर के खुश्बू में रिश्तों की गर्मजोशी बरकरार रहे आओ सहेज लें यादों को वक़्त रेत की तरह सरक रहा है…
मेरा रणायरा अब बदल चला है